गणेश चतुर्थी का क्या है इसका इतिहास और जानिए क्यों मनाई जाती है
•भगवान गणेश को विनायक के नाम से भी जाना जाता है। गणेशजी के जन्मदिन के रूप में हर साल देश में बड़ी धूमधाम से 10 दिनों तक गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी भारत के कई राज्यों में और यहां तक कि कई दूसरे देशो जैसे थाईलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया और नेपाल में भी भक्ति और खुशी से मनाई जाती है। महाराष्ट्र, गोवा, केरल, तमिलनाडु कुछ ऐसे शहरों में से एक हैं जहाँ यह उत्सव सालो से मनाया जाता है
●ऐसा माना जाता है कि माता पार्वती गणेश की निर्माता हैं।
•कहानी के अनुसार देवी पार्वती ने चंदन के मिक्षण से शिव की अनुपस्थिति में गणेश का निर्माण किया। जब वह स्नान कर रही थी, तो उन्होंने गणेश को अपने स्नानघर के दरवाज़े की रक्षा करने का काम दिया। शिव के घर लौटने के बाद, गणेश ने उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया जिसके कारण गणेश और शिव के बीच युद्ध हो गया और गुस्से में शिव ने गणेश का सिर काट दिया। यह देखकर माता पार्वती को गुस्सा आ गया। यह देखकर भगवान शिव ने गणेश को दुबारा जीवित करने का वादा किया और उन्होंने गणेश के धड़ पर गज का सर लगा दिया और इसी तरह गजानन का जन्म हुआ।
•हालांकि इस बात का कोई सख्त प्रमाण नहीं है कि गणेश चतुर्थी कब से मनाई गई, लेकिन इतिहासकारों के अनुसार सबसे पहले गणेश चतुर्थी सातवाहन, राष्ट्रकूट और चालुक्य के शासन में मनाई गई थी।
●तिलक वापस लाए थे परंपरा●
•उस समय देश पर भी ब्रिटिशर्स का राज था। इसलिए यहां कोई भारतीय त्योहार नहीं मनता था
•लेकिन उस वक्त बाल गंगाधर तिलक ही थे, जो इस गणेश चतुर्थी की परंपरा को वापस लाए। उन्होंने मंडप में गणेश की मूर्ति को स्थापित करने और दसवें दिन विसर्जन की परंपरा की शुरुआत की। इसका उदेश्य सभी समुदायों के लोगो को एकजुट करना था।
•उस समय देश पर भी ब्रिटिशर्स का राज था। इसलिए यहां कोई भारतीय त्योहार नहीं मनता था
•लेकिन उस वक्त बाल गंगाधर तिलक ही थे, जो इस गणेश चतुर्थी की परंपरा को वापस लाए। उन्होंने मंडप में गणेश की मूर्ति को स्थापित करने और दसवें दिन विसर्जन की परंपरा की शुरुआत की। इसका उदेश्य सभी समुदायों के लोगो को एकजुट करना था।



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